निवेश के तरीके

विश्व बाजार शुल्क और सीमा

विश्व बाजार शुल्क और सीमा
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सीमा शुल्क क्या है | सीमाशुल्क की परिभाषा किसे कहते है | प्रकार , महत्व विशेषता दूसरा नाम sima shulk kya hai

sima shulk kya hai सीमा शुल्क क्या है | सीमाशुल्क की परिभाषा किसे कहते है | प्रकार , महत्व विशेषता दूसरा नाम ?

सीमाशुल्क एवं व्यापार आम सहमति (गैट)
पृष्ठभूमि
व्यापार एवं व्यावसायिक नीति की देखभाल करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाने के प्रयास 1947 में ही शुरू हो गये थे। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन के घोषणापत्र की रूपरेखा हवाना सम्मेलन के दौरान ही बन गयी थी, लेकिन कभी भी इसका अनुमोदन नहीं हो सका क्योंकि इसके समर्थकों और विरोधियों के बीच मतभेद उभर आये थे। समर्थक बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की वकालत कर रहे थे तो विरोधी राष्ट्रीय आधारपूर्ण रोजगार नीतियों की। फिर भी अमरीका का गैट प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया जिस पर अनेक देशों ने हस्ताक्षर भी कर दिए। इस तरह गैट का जन्म बिना किसी औपचारिक संगठन और सचिवालय के हो गया। यह विश्व व्यापार के क्षेत्र में बढ़ते उदारीकरण और गैट समझौतों का ही नतीजा था कि 1995 में विश्व व्यापार संगठन अस्तित्व में आ सका।

सदस्य राज्यों के बीच उचित और मुक्त अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना गैट का मुख्य उद्देश्य था और इसके लिए गैट के तहत दो मुख्य सिद्धांतों-अभेदमूलकता तथा पारस्परिकता- को अंगीकार किया गया था। भेदभाव न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए गैट सदस्यों ने तय किया था कि तमाम आयात निर्यात में वे अनुकूलतम राष्ट्र (एम एफ एन मोस्ट फेवर्ड नेशन) के सिद्धान्त का अनुपालन करेंगे। इसका मतलब था कि विश्व बाजार शुल्क और सीमा प्रत्येक राष्ट्र के साथ “अनुकूलतम राष्ट्र” जैसा व्यवहार किया जाएगा। फिर भी गैट आर्थिक गोलबंदी को नहीं रोक सका । उदाहरण के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्रों अथवा सीमाशुल्क यूनियनों के गठन को मंजूरी दी गई, बशर्ते ऐसी लामबंदी घटक क्षेत्रों में व्यापार को सुगम बनाती हो तथा इससे दूसरे पक्षों के व्यापार पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता हो।

तटकर और व्यापार से तटकर बाधा को दूर करने के उद्देश्य गैट वार्ता के कई-कई दौर चले। यह इसीका नतीजा था व्यापार ड्यूटी में कमी आई। आज गैट में दुनिया के दो तिहाई राज्य शामिल हैं।

उरुग्वे चक्र एवं विश्व व्यापार संगठन
बहुपक्षीय व्यापार समझौतों का अंतिम और आठवाँ चक्र जिसकी बैठक उरुग्वे के पुन्ते देल एस्टेट में हुई थी, जो मुख्य रूप से तीन मसलों पर केन्द्रित था –
1) व्यापार विषयक बौद्धिक संपदा अधिकार (ट्रिप्स),
2) व्यापार विषयक निवेश युक्ति (ट्रिप्स) तथा,
3) कृषि वस्तुओं का व्यापार।
तीसरी दुनिया के देश गैट समझौतों से कमोवेश असंतुष्ट ही रहे हैं। व्यापार से संबंधित बौद्धिक संपदा के उदारीकरण का मतलब यह होगा कि अल्पविकसित देशों को उन्नत देशों अथवा अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रतियोगिता में खड़ा होना होगा। बौद्धिक संपदा के तहत कॉपीराइट्स पेटेन्ट तथा ट्रेडमार्क के मसले आते हैं। संभव है कि इससे अल्पविकसित देशों की घरेलू प्रौद्योगिकी एवं उनके नवजात उद्योगों खासकर चिकित्सा एवं दवा उद्योगों, को नुकसान उठाना पड़े। गैट के ट्रिप्स प्रावधानों के अंतर्गत सेवा क्षेत्र भी शामिल हैं। इससे विकासशील देशों में रोजगार की स्थिति पर बुरा असर होने की संभावना है। क्योंकि तब यहाँ के सेवा क्षेत्र में उन्नत देशों के पेशेवरों की बाढ़ की संभावना है। क्योंकि तब यहाँ के सेवा क्षेत्र में उन्नत देशों के पेशेवरों की बाढ़ आ जाएगी। गैट के तहत कृषि का सवाल भी एक विवादास्पद सवाल है। जहाँ अमरीका कृषि क्षेत्र उन्मुक्त व्यापार और सब्सिडी वापस लेने का पक्षधर था, वहीं यूरोपीय आर्थिक संघ के देश, खासकर फ्रांस जो अपने कृषि क्षेत्र को भारी सब्सिडी देता है, इसका विरोध कर रहे थे। तब अमरीका ने धमकी दी कि वह उन देशों के खिलाफ सुपर 01 के जरिये दंडात्मक कानूनी कार्रवाई करेगा जो मुक्त व्यापार का अनुसरण नहीं करेंगे।

भूमंडलीकरण और तीसरी दुनिया
8 वें दशक की एक विशेषता यह भी है कि इस काल में औद्योगिक पूँजीवाद का फैलाव अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की परिधि में हुआ है। उदाहरण के लिए दक्षिण कोरिया, ताईवान, सिंगापुर तथा पड़ोस के नये ओद्योगिक देशों जिन्हें दक्षिणपूर्व एशियाई बाघ के नाम से जाना जाता है, के नाम गिनाये जा सकते हैं। लेकिन इन देशों में तीसरी दुनिया की मात्र 2 प्रतिशत आबादी निवास करती है। 8वें दशक में दुनिया में गरीबों और अमीरों के बीच खायी बढ़ी जो आज भी बढ़ रही है। उत्तर दक्षिण वार्ता के विश्व बाजार शुल्क और सीमा जरिये नयी अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था कायम करने का सपना दक्षिण के लोगों के जीवन में कोई बेहतरी नहीं ला सका। यह विश्वास, जैसा कि नवशास्त्रीय अर्थशास्त्र का कहना था, कि अप्रतिबंधित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से गरीब देशों को धनी देशों के स्तर तक पहुंचने में मदद मिलेगी, ऐतिहासिक अनुभव को झुठलाता है। उल्टे, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की ऋणदाय नीतियों तथा तीसरी दुनिया खासकर अफ्रीका पर थोपे गये शतों एवं ढाँचागत समायोजन कार्यक्रमों की वजह इन देशों में बेरोजगारी व बढ़ती गरीबी की समस्याएँ पैदा हो गई। हालत यहाँ तक पहुँच गयी है कि भोजन की छीनाझपटी के लिए दंगे तक हो जाते हैं। यहाँ यह बात भी काबिलेगौर है विश्व बाजार शुल्क और सीमा कि मुक्त व्यापार के अंतर्राष्ट्रीय तरीकों से मुद्रास्फीति बढ़ी है, अर्थव्यवस्था में मंदी आई है, व्यापार के लिहाज से अनेक यूरोपीय देशों का हास हुआ है।

अर्थव्यवस्था का भूमंडलीकरण, आई.बी.आर.डी.
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व व्यापार संगठन
इकाई की रूपरेखा
उद्देश्य
प्रस्तावना
भूमंडलीकरण-अर्थ एवं संरचना
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ब्रिटेन वुड्स तथा व्यवस्था
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष-उद्देश्य व कार्य
संरचना
आई बी आर डी उद्देश्य
कार्य
गैट
उरुग्वे चक्र एवं विश्व व्यापार संगठन
विश्व व्यापार संगठन
उत्तर ब्रिटेन वुड्स विकास
भूमंडलीकरण और तीसरी दुनिया
भूमंडलीकरण का प्रभाव
सारांश
शब्दावली
कुछ उपयोगी पुस्तकें
बोध प्रश्नों के उत्तर

उद्देश्य
इस खंड के अंतर्गत विश्व अर्थव्यवस्था के भूमंडलीकरण के धर्म की व्याख्या की गयी है तथा उन संस्थाओं का वर्णन किया गया है जो भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में अस्तित्व में आये हैं। इस इकाई के अध्ययन के पश्चात् आपः
ऽ भूमंडलीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया की छानबीन करने में समर्थ हो सकेंगे,
ऽ वैश्विक अर्थव्यवस्था का संचालन करने वाली संस्थाओं के कार्य और उनकी संरचना का वर्णन कर सकेंगे, और
ऽ भूमंडलीकरण के प्रभाव की आलोचनात्मक आंकलन करने में सफल हो सकेंगे।

प्रस्तावना
हम सभी आज भूमंडलीकरण शब्द से वाकिफ हैं। भूमंडलीकरण निहितार्थ यही है कि दुनिया तेजी से अंतर्राष्ट्रीय अंतनिर्भरता की प्रक्रिया में शामिल होती जा रही है। नतीजन आज वैसी अर्थव्यवस्थाएँ अप्रासंगिक हो गयी हैं जिनकी कोई खास राष्ट्रीय पहचान हो तथा जो क्षेत्र विशेष के सर्वोपरि विधानी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत संचालित हों। इसका यह मतलब नहीं है कि आम समानता पर आधारित विश्व समुदाय का उदय हो गया है । ऐतिहासिक रूप से, अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था राष्ट्र-राज्य के आधार पर विकसित हुई है । यातायात और संचार के क्षेत्र में होने वाली क्रांति तथा द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद वाले काल में परिष्कृत औद्योगिक उत्पादन की प्रौद्योगिकी की वजह से आज पूँजीवादी विश्व बाजार स्थापित हो चुका है। युद्धोत्तर काल में स्थापित ब्रिटेन वुड व्यवस्था जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं व्यवसाय के नियम तय किए थे, सांतवें दशक के आते आते गहराकर गिर गये। नवें दशक में भूमंडलीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई है। विश्व व्यापार संगठन के रूप में नई संस्थाएँ एवं नये नियमों का जन्म हुआ। आज इन्हीं संस्थाओं एवं नियमों के जरिये विश्व व्यापार का संचालन होता है।

महंगी होगी व्हिस्की! जानिए भारत का ’बदला’ कैसे बढ़ाएगा स्कॉच से लेकर लिप्स्टिक के दाम

ब्रिटेन द्वारा भारत की स्टील पर प्रतिबंध लगाने से भारत को जो नुकसान होगा उसकी भरपाई ब्रिटेन से आने वाले उत्पादों पर सीमा शुल्क बढाकर पूरी की जाएगी।

Sachin Chaturvedi

Written By: Sachin Chaturvedi @sachinbakul
Published on: September 29, 2022 12:10 IST

Duty on Scotch and Lipsticks - India TV Hindi News

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Highlights

  • भारत ने ब्रिटेन से आने वाली 22 वस्तुओं पर ’जवाबी शुल्क लगा दिया है
  • ब्रिटेन के स्टील उत्पादों पर बैन से निर्यात में 2,विश्व बाजार शुल्क और सीमा विश्व बाजार शुल्क और सीमा 19,000 टन की गिरावट आएगी
  • भारत ने डब्ल्यूटीओ की वस्तु व्यापार परिषद को अधिसूचित किया है

अगर आप प्रीमियम व्हिस्की पीते हैं तो आपके लिए बुरी खबर है, लेकिन यदि आप शराब नहीं भी पीते हैं तब भी आपको यह खबर परेशान कर सकती है। क्योंकि जल्द में इंग्लैंड से आने वाली शराब से लेकर महिलाओं के कॉस्मेटिक, पिज्जा का चीज़ और डीजल वाहन महंगे हो जाएंगे। यह सब भारत की उस बदले की कार्रवाई के कारण होने जा रहा है, जिसके तहत भारत ने ब्रिटेन से आने वाली 22 वस्तुओं पर ’जवाबी शुल्क लगा दिया है।

क्या है मामला

भारत की बदले की कार्रवाई के पीछे हाल ही में ब्रिटेन द्वारा भारतीय स्टील उत्पादों पर पाबंदी लगाना है। भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को भेजी सूचना में कहा कि अनुमान के अनुसार ब्रिटेन के स्टील उत्पादों को लेकर रक्षोपाय उपायों के परिणामस्वरूप निर्यात में 2,19,000 विश्व बाजार शुल्क और सीमा टन की गिरावट आएगी। इसपर शुल्क संग्रह 24.77 करोड़ डॉलर बैठता है। इसमें कहा गया है कि उसी के अनुसार भारत ने दी गयी रियायतों को निलंबित करने का प्रस्ताव किया है।

भारत ने कैसे लिया बदला

ब्रिटेन द्वारा भारत की स्टील पर प्रतिबंध लगाने से भारत को जो नुकसान होगा उसकी भरपाई ब्रिटेन से आने वाले उत्पादों पर सीमा शुल्क बढाकर पूरी की जाएगी। सूचना के अनुसार, ‘‘भारत ने डब्ल्यूटीओ की वस्तु व्यापार विश्व बाजार शुल्क और सीमा परिषद को अधिसूचित किया है कि शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौते 1994 तथा रक्षोपाय समझौते के तहत छूट या अन्य बाध्यताओं को उसने निलंबित कर दिया है। यह ब्रिटेन के कदम से प्रभावित होने वाले व्यापार की मात्रा के बराबर है।’’

स्कॉच और कॉस्मेटिक के अलावा इन प्रोडक्ट पर बढ़ी ड्रयूटी

जिन अन्य उत्पादों पर अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाया गया है, उसमें प्रोसेस्ड चीज, स्कॉच, ब्लेंडेड व्हिस्की, जिन, पशु चारा, तरलीकृत प्रोपेन, कुछ आवश्यक तेल, कॉस्मेटिक, चांदी, प्लैटिनम, टर्बाे जेट, डीजल इंजन के कलपुर्जे आदि शामिल हैं।

कब तक लागू रहेगा बैन

सूचना में कहा गया है, ‘‘रियायतों और अन्य दायित्वों का निलंबन तब तक लागू रहेगा जब तक ब्रिटेन रक्षोपाय उपायों को नहीं हटा लेता।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘भारत यह स्पष्ट करना चाहता है कि रियायतों का निलंबन ब्रिटेन के उपायों से प्रभावित व्यापार की मात्रा के बराबर होगा।’’ ब्रिटेन ने जो कदम उठाये हैं उसमें 25 प्रतिशत शुल्क (आउट ऑफ कोटा) के साथ 15 स्टील उत्पाद श्रेणियों पर लगाया गया शुल्क-दर कोटा शामिल हैं।

भारत ने जताई थी चिंता

दोनों देशों ने पांच अगस्त को ‘ऑनलाइन’ तरीके से ब्रिटेन की तरफ से कुछ स्टील उत्पादों के लिये जारी रक्षोपाय उपायों को आगे बढ़ाये जाने पर चर्चा की थी। भारत ने एक सितंबर को इसके जवाब में कदम उठाने का प्रस्ताव किया था। भारत ने विश्व व्यापार संगठन में ब्रिटेन के कदम को लेकर चिंता जतायी है।

दोनों देशों में 17 अरब डॉलर का कारोबार

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में बढ़कर 17.5 अरब डॉलर रहा जो 2020-21 में 13.2 अरब डॉलर था। भारत का निर्यात 2021-22 में 10.5 अरब डॉलर तथा आयात सात अरब डॉलर था।

अर्थ जगत की 5 बड़ी खबरें: पाकिस्तान ने कपास के आयात पर सीमा शुल्क पर दी छूट और जानें शेयर बाजार का हाल

पाकिस्तान के आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) ने वस्त्र उद्योग को सुचारू रूप से चलाने के लिए 30 जून तक सूती धागे के आयात पर सीमा शुल्क हटाए जाने को मंजूरी दे दी है। कोरोना के बढ़ते मामले और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले-जुले संकेतों के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहा।

फोटो: सोशल मीडिया

नवजीवन डेस्क

जापानी कंपनी एआईडब्ल्यूए ने 5 ऑडियो उत्पादों के साथ भारतीय बाजार में रखा कदम

फोटो: IANS

जापानी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड एआईडब्ल्यूए ने गुरुवार को ऑडियो रेंज में लॉन्च किए गए पांच उत्पादों के साथ भारत में प्रवेश की घोषणा की। 699 रुपये से 7,999 रुपये के बीच पेश किए जाने वाले उत्पाद अगले सप्ताह से अमेजन और 500 से अधिक रिलायंस डिजिटल, जियो स्टोर्स (प्लस रिलायंस डिजिटल डॉट इन) पर उपलब्ध होंगे।

एआईडब्ल्यूए इंडिया के प्रबंध निदेशक अजय मेहता ने आईएएनएस को बताया, "भारत वैश्विक रोडमैप पर सबसे तेजी से बढ़ने वाले उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में से एक है और शोध रिपोटरें से पता चलता है कि भारतीयों का व्यक्तिगत ऑडियो उत्पादों के प्रति बहुत झुकाव है।"

पाकिस्तान ने कपास के आयात पर सीमा शुल्क पर दी छूट

फोटो: IANS

पाकिस्तान के आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) ने वस्त्र उद्योग को सुचारू रूप से चलाने के लिए 30 जून तक सूती धागे के आयात पर सीमा शुल्क हटाए जाने को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्रालय ने यहां इसकी जानकारी दी है। मंत्रालय के दिए बयान विश्व बाजार शुल्क और सीमा के हवाले से सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में बताया, शीर्ष आर्थिक निकाय ने घरेलू उत्पादन और आदानों की समग्र मांग के बीच अंतर को कम करते हुए मूल्य-वर्धित उद्योग में कपास और सूती धागे की सुचारू आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है।

समिति के इस निर्णय के बाद वाणिज्य, वस्त्र उद्योग, व्यापार, उत्पादन और निवेश पर प्रधानमंत्री के सलाहकार अब्दुल रजाक दाऊद ने ट्विटर पर कहा कि पिछले साल दिसंबर में सूती धागे के आयात पर नियामक शुल्क पहले ही वापस ले लिया गया था।

मार्च में 7.39 फीसदी बढ़ी थोक महंगाई

फोटो: IANS

कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और धातुओं के दाम में भारी इजाफा होने से बीते महीने मार्च में सालाना थोक महंगाई दर बढ़कर 7.39 फीसदी हो गई। इससे पहले फरवरी में थोक महंगाई दर 4.17 फीसदी दर्ज की गई थी। थोक महंगाई दर के ये आधिकारिक आंकड़े गुरुवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी किए गए। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर बीते महीने 7.39 फीसदी रही। थोक मूल्य सूचकांक में सबसे ज्याद भारांक (64.2 फीसदी) वाले विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों की कीमतों में 7.34 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि फ्यूल और पावर (13.2 फीसदी भारांक) की कीमतों में 10.25 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं, प्राइमरी आर्टिकल्स (22.6 फीसदी भारांक) की महंगाई 6.40 फीसदी बढ़ी।

खाद्य सूचकांक (24.4 फीसदी भारांक) में मार्च महीने के दौरान 5.28 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खाद्य सूचकांक में प्राइमरी आर्टिकल्स और विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों में से खाद्य उत्पाद शामिल होते हैं। इससे पहले फरवरी 2021 में खाद्य सूचकांक में 3.31 फीसदी का इजाफा हुआ था।

गूगल असिस्टेंट की मदद से अब खोए हुए आईफोन को ढूंढ़ने में मिलेगी मदद

फोटो: IANS

गूगल की तरफ से गूगल असिस्टेंट को एक ऐसे फीचर के साथ पेश किए जाने की बात कही गई है, जिसकी मदद से आईफोन यूजर्स अपने खोए हुए आईफोन का पता लगा पाने में सक्षम हो सकेंगे। एंड्रॉयड यूजर्स काफी लंबे समय से इस फीचर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

मैकरूमर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें एप्पल के ओन फाइंड माय सिस्टम के जैसे ही विशेषताएं होंगी, जिसे आईफोन के लिए पेश किया जाएगा।

रिपोर्ट में कहा गया, इस फीचर का लाभ केवल वे ही यूजर्स उठा पाएंगे, जिनके पास आईओएस के लिए गूगल असिस्टेंट समर्थित स्मार्ट स्पीकर और गूगल होम ऐप होगा। तभी ये अपने खोए हुए डिवाइसों का पता लगा पाएंगे।

शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स 260 अंक की तेजी के साथ बंद

फोटो: IANS

कोरोना के बढ़ते मामले और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले-जुले संकेतों के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहा। सुबह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 32 अंक टूटकर 48,512.77 पर खुला। लेकिन सुबह 9.30 बजे तक सेंसेक्स 142 अंकों की उछाल के साथ 48,686.17 पर पहुंच गया। इसके बाद सुबह 9.35 के बाद सेंसेक्स फिर से लाल निशान में पहुंच गया। सुबह 10.33 के आसपास सेंसेक्स 427 अंक टूटकर 48,117.68 तक पहुंच गया।

दोपहर 2.50 बजे के आसपास सेंसेक्स फिर हरे निशान में पहुंच गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 259.62 अंकों की तेजी के साथ 48,803.68 पर बंद हुआ।

दूसरी तरफ, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 18 अंक की तेजी के साथ 14,522.40 पर खुला। यह बढ़ते हुए 14,566.80 तक और नीचे गिरते हुए 14,432.35 तक गया। कारोबार के अंत में निफ्टी 76.65 अंकों की तेजी के साथ 14,581.45 पर बंद हुआ।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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विश्व बाजार शुल्क और सीमा

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Q. “The manufacturer ‘A’ produces solar panels in a foriegn country. ‘A’ exports solar panels to India at an unfairly lower price than its domestic market. Other manufacturers like ‘B’ in India producing similar products started crippling.” Which of the following duties can the Indian government impose to protect its manufacturers from the competitive price offered by A, under the Special Safeguard Mechanism of the World Trade Organization?Q. "निर्माता 'A' विदेश में सौर पैनलों का उत्पादन करता है। 'A' अपने घरेलू बाजार की तुलना में अनुचित रूप से कम कीमत पर भारत को सौर पैनल का निर्यात करता है। भारत में 'B' जैसे समान उत्पादों का उत्पादन करने वाले अन्य निर्माताओं पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ने लगा।" विश्व व्यापार संगठन के विशेष सुरक्षा तंत्र के तहत भारत विश्व बाजार शुल्क और सीमा सरकार अपने निर्माताओं को 'A' द्वारा प्रस्तावित प्रतिस्पर्धी मूल्य से बचाने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा शुल्क लगा सकती है?

Q. “The manufacturer ‘A’ produces solar panels in a foriegn country. ‘A’ exports solar panels to India at an unfairly lower price than its domestic market. Other manufacturers like ‘B’ in India producing similar products started crippling.”

Which of the following duties can the Indian government impose to protect its manufacturers from the competitive price offered by A, under the Special Safeguard Mechanism of the World Trade Organization?

Q. "निर्माता 'A' विदेश में सौर पैनलों का उत्पादन करता है। 'A' अपने घरेलू बाजार की तुलना में अनुचित विश्व बाजार शुल्क और सीमा रूप से कम कीमत पर भारत को सौर पैनल का निर्यात करता है। भारत में 'B' जैसे समान उत्पादों का उत्पादन करने वाले अन्य निर्माताओं पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ने लगा।"

विश्व व्यापार संगठन के विशेष सुरक्षा तंत्र के तहत भारत सरकार अपने निर्माताओं को 'A' द्वारा प्रस्तावित प्रतिस्पर्धी मूल्य से बचाने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा शुल्क लगा सकती है?

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