क्रिप्टोक्यूरेंसी ट्रेडिंग

क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन

क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन
बिटकॉइन एटीएम :

क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन

साक्ष्‍यों के विश्‍लेषण से पता चला है कि ग्रुप, अपनी पबिलक लिमिटेड कंपनियों के अकाउंट बुक्‍स में हेराफेरी में भी संलिप्‍त था. तलाशी क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन की कार्रवाई में 1 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि के बे‍हिसाब लेनदेन का पता चला है.

तमिलनाडु ( Tamil Nadu) में लगभग 10 फिल्म निर्माताओं और वितरकों से जुड़े परिसरों पर आयकर (Income tax) के छापे मारे जा रहे हैं, जिनमें कलाईपुली ​​थानू, एसआर प्रभु, अंबु चेझियां और ज्ञानवेल राजा शामिल हैं.

"पेट्रोल और डीजल की कीमतें 26 जून 2020 और 19 अक्टूबर 2014 से बाजार से निर्धारित होने वाली बना दी गई. तब से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियां (ओएमसी) इसकी कीमतें तय करती हैं."

आयकर विभाग ने करदाताओं की तरफ से आयकर रिटर्न (आईटीआर) जमा करने के बाद उसके सत्यापन की समय सीमा को 120 दिन से घटाकर 30 दिन कर दिया है.

Cryptocurrency: रिजर्व बैंक क्रिप्टो पर बैन लगाना चाहता है लेकिन इसके लिए चाहिए ग्लोबल सपोर्ट-निर्मला सीतामरण

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने एक बार फिर क्रिप्टोकरेंसीज (Cryptocurrencies) के बारे में सरकार का रुख साफ किया है। सोमवार (18 जुलाई) को उन्होंने संसद में इस बारे में बयान दिया। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध या सख्त नियमों के प्रभावी होने के लिए दूसरे देशों का सहयोग (Global Collaboration) जरूरी है।

RBI क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर सख्त नियम बनाने और इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने के पक्ष में रहा है। सीतारमण ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा, "RBI देश की मॉनेटरी और फिस्कल स्टैबिलिटी के लिए क्रिप्टोकरेंसीज को खतरा बता चुका है। उसने इस सेक्टर के लिए कानून बनाने की सिफारिश की है। RBI का मानना है कि इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। "

भारत के एक और पड़ोसी देश में Cryptocurrency को बैन करने की कवायद, जानिए वजह

चीन पहले ही क्रिप्‍टोकरेंसी को बैन कर चुका है. अब पड़ोसी पाकिस्‍तान में भी राष्‍ट्रीय बैंक और संघीय सरकार ने Cryptocurrency को बैन करने की सिफारिश की है.

चीन पहले ही क्रिप्‍टोकरेंसी को बैन कर चुका है. अब पड़ोसी पाकिस्‍तान में भी राष्‍ट्रीय बैंक और संघीय सरकार ने Cryptocurrency को बैन करने की सिफारिश की है.

चीन पहले ही क्रिप्‍टोकरेंसी को बैन कर चुका है. अब पड़ोसी पाकिस्‍तान में भी राष्‍ट्रीय बैंक और संघीय सरकार ने Cryptocurrency को बैन करने की सिफारिश की है. सिफारिश से पाकिस्‍तान के क्रिप्‍टो निवेशकों में खलबली मची है.

  • News18Hindi
  • Last Updated : January 13, 2022, 15:59 IST

नई दिल्‍ली. Cryptocurrency News : चीन के बाद पाकिस्‍तान में भी अब क्रिप्‍टोकरेंसी को बैन करने प्रक्रिया चल पड़ी है. संघीय सरकार और स्‍टेट बैंक ऑफ पाकिस्‍तान ने Cryptocurrency को देश में पूरी तरह बैन करने की सिफारिश की है. सिफारिश को कानून मंत्रालय और वित्‍त मंत्रालय के पास समीक्षा करने के लिये भेजा गया है.

सिंध हाईकोर्ट भी सरकार से क्रिप्‍टोकरेंसी के संबंध में नियम बनाने को कह चुका है. पाकिस्‍तानी मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक संघीय सरकार (federal government) और स्‍टेट बैंक ऑफ पाकिस्‍तान (Central Bank of Pakistan) ने क्रिप्‍टोकरेंसी को पूरी तरह बैन करने की सिफारिश की है. साथ ही क्रिप्‍टोकरेंसी एक्‍सचेंज पर जुर्माने लगाने की भी बात कही गई है.

सिंध हाई कोर्ट तक पहुंचा था क्रिप्‍टो केस

पाकिस्‍तान में क्रिप्‍टोकरेंसी (Pryptocurrency in Pakistan) के बारे में नियम बनाने की मांग को लेकर एक व्‍यक्ति ने सिंध हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 20 अक्‍टूबर 2020 हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वह इसके संबंध में कायदे-कानून बनाये. अब सरकार और नेशनल बैंक की मंशा को देखते हुये लगता है कि नियम बनाने की आवश्‍यकता ही न रहे, क्‍योंकि जब क्रिप्‍टोकरेंसी पूरी तरह बैन हो जायेगी तो नियमों का कोई काम ही नहीं रह जायेगा.

पाकिस्‍तान में क्रिप्‍टोकरेंसी को बैन किये जाने की सिफारिश के पीछे इसका आतंकवादी गतिविधियों में इस्‍तेमाल होने और मनी लॉंड्रिंग को माना जा रहा है. लंबे समय से पाकिस्‍तान में कहा जा रहा था कि क्रिप्‍टोकरेंसी का प्रयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने में हो रहा है. ऐसे ही आरोप क्रिप्‍टोकरेंसी पर कई अन्‍य देशों में लग रहे हैं, जिनमें भारत भी शामिल है.

उलझन में इन्‍वेस्‍टर

हालांकि, अभी क्रिप्‍टोकरेंसी पर बैन लगान नहीं है, लेकिन फिर भी क्रिप्‍टोकरेंसी में निवेश करने वाले पाकिस्‍तानी उलझन में हैं. कानून तथा वित्‍त मंत्रालय इस सिफारिश को मानते हुए क्रिप्‍टो पर बैन लगायेंगे या इसके ट्रेड के लिये कोई कानूनी ढांचा बनायेंगे, इसका पता किसी को नहीं है. यही सस्‍पेंस निवेशकों को खाये जा रहा है. अभी यह साफ नहीं है कि अगर बैन लगता है तो इन्‍वेस्‍टर्स की लगाई पूंजी का क्‍या होगा. वहीं, अब पॉपुलर क्रिप्‍टो इन्‍फ्लूएनसर्स “यूथ वांट क्रिप्‍टो” का नारा बुलंद कर रहे हैं और प्रधानमंत्री इमरान खान से इस विषय पर अपनी राय स्‍पष्‍ट करने की मांग कर रहे क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन हैं.

कुछ देशों में क्रिप्‍टोकरेंसी को कुछ हद तक वैध करेंसी का दर्जा दिया है. लेकिन अधिकतर देशों में क्रिप्‍टो के संबंध में कोई नियम-कानून नहीं है. साउथ कोरिया ने इसको बैन करने की क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन बजाय एक एक लीगल फ्रेमवर्क बना दिया है ताकि इसमें अवैध गतिविधियां न हों. वहीं चीन ने इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है.

क्रिप्टो, भारी उतार-चढ़ाव का फंदा, फोमो, और सारा आसमां

क्रिप्टो क्या है और यह इतना अस्थिर क्यों है? - स्मार्ट मनी

भारत में सोना, पारंपरिक रूप से सबसे लोकप्रिय इन्वेस्टमेंट रहा है और यहाँ घरों में सामूहिक रूप से जमा 25,000 टन सोने का सबसे बड़ा निजी स्टॉक है। हालांकि इन्वेस्टमेंट के तौर पर इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि यह नई संपत्ति का सृजन है और इसे सुरक्षित रखने के लिए पैसे खर्च होते हैं। भारतीय शेयर बाजार आज इन्वेस्टमेंट और ट्रेड के लिए लोकप्रिय स्थान हैं और ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा के कारण इन्वेस्टर और ट्रेडर दोनों के लिए इन बाज़ारों में ट्रेड करना आसान हो गया है। हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि ये एकमात्र तरीके नहीं हैं जिनसे लोग अपने फंड को इन्वेस्ट या ट्रेड कर सकते हैं।

क्रिप्टोकरेंसी क्या है?

टेक्कीनोलॉजी की दुनिया हुई तरक्की और साथ ही स्मार्ट डिवाइस और नॉलेज दोनों की पहुंच ने आज क्रिप्टोकरेंसी को बेहद लोकप्रिय बना दिया है। क्रिप्टोकरेंसी को ऐसे समझें कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वर्चुअल करेंसी है और जिसकी सुरक्षा क्रिप्टोग्राफी के ज़रिये होती है। सीक्योरिटी की इस परत से इस करेंसी को फोर्ज या डबल स्पेंड करना एकदम असंभव है। इसकी बनावट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई क्रिप्टोकरेंसी को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के ज़रिये बनाया गया है जिससे बगैर एडिट किये सारी जानकारी रिकॉर्ड करने और जारी करने में मदद मिलती है। सीधे शब्दों में कहें तो यह टेक्नोलॉजी विभिन्न किस्म के एन्क्रिप्शन के ज़रिये करेंसी पर नियंत्रण रखती है। किसी भी फंड ट्रांसफर को वेरीफाय करने के लिए एन्क्रिप्शन तकनीक का अलग से उपयोग किया जाता है। ब्लॉकचेन से अंततः यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि हर लेन-देन ईमानदारी होता है। क्रिप्टोकरेंसी जो चीज़ सबसे अलग बनाती है, वह यह है कि इसका उपयोग सेंट्रल अथॉरिटी नहीं करती है। इसकी प्रासंगिकता यह है कि करेंसी के रूप में यह सरकार के क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन किसी भी हस्तक्षेप या फेर-बदल के मामले में यह तकनीकी रूप से इम्यून है।

क्रिप्टोकरेंसी में इतना उतार-चढ़ाव क्यों होता है?

क्रिप्टोकरेंसी पहले दिन से ही भारी उतार-चढ़ाव के लिए जानी जाती है। इन्वेस्टर ने उछाल के दौरान बहुत पैसा कमाया है और जब बाज़ार टूटा तो उन्हें भारी नुकसान भी हुआ है। क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की वजह की जांच नीचे की गई है।

सट्टेबाजी की ताक़त क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन - क्रिप्टोकरेंसी का उतर-चढ़ाव काफी हद तक इन्वेस्टर और ट्रेडर के सट्टे की प्रकृति से जुड़ा है जिनमें से कुछ बाज़ार में उछाल के साथ भारी मुनाफ़ा दर्ज़ करने की संभावना से सम्मोहित हैं। बड़े पैमाने पर सट्टे पर आधारित दांव लगाने से उतार-चढ़ाव वाले बाज़ार को और अस्थिर बनाते हैं।

ट्रेडर की जानकारी – शेयर बाजार और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट के उलट, क्रिप्टोकरेंसी डोमेन में इन्वेस्ट करने के लिए बहुत जानकारी जुटाने की ज़रुरत नहीं होती है। इन्वेस्टर के पास सिर्फ इंटरनेट और थोड़े से पैसे होने चाहिए। यही इस बाजार को कम कम या बगैर किसी अनुभव वाले ट्रेडर के लिए इतना आकर्षक बनाता है। इंस्टीच्यूशनलाइज्ड ट्रेडिंग मार्केट में शामिल लोग क्रिप्टोकरेंसी बाजार से बहुत सावधान और सतर्क रहते हैं और इसमें निवेश को जोखिम के तौर पर में देखते हैं। इसलिए इस डोमेन में क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन औसत इन्वेस्टर को क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार में की बारीकियों के बारे में कम जानकारी होती है। वे प्रचार, अनिश्चितता, संदेह, डर और ज़बरदस्त हेराफेरी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इस डोमेन के औसत ट्रेडर के विपरीत परिस्थितियों में शांत बने रहने की संभावना कम होती है जबकि अनुभवी ट्रेडर का खुद पर पूरा नियंत्रण होता है।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में इन्वेस्ट करना -

क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ारों में निवेश करने के इच्छुक लोगों को इसकी अस्थिरता से जुड़े नुकसान के बारे में पता होना चाहिए। मशहूर हस्तियों के समर्थन से विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी की कीमत प्रभावित होती है। मसलन डॉगकॉइन को ही लें, जिसमें इलॉन मस्क के प्रमोट करने से उछाल दर्ज़ हुई। कहा जा रहा है कि ऐसे एंडोर्समेंट से ये करेंसी कहां जाएंगी इसका कोई अता-पता नहीं है। इसका मतलब यह है कि इस करेंसी के वैल्यूएशन में नाटकीय रूप से गिरावट आ सकती है। बड़ी रकम इन्वेस्ट करने से पहले लोगों को अपनी पसंदीदा क्रिप्टोकरेंसी की मौजूदा क्रिप्टो टेक्नोलॉजी को समझने का प्रयास ज़रूर करना चाहिए। इसके अलावा बड़ी मात्रा में इन्वेस्ट करने से पहले उन्हें इसके बाज़ार रुझान और इसी तरह की और करेंसी की जांच-परख ज़रूर करनी क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन चाहिए और समझना चाहिए कि इनमें इतना उतार-चढ़ाव क्यों आता है।

सुप्रीम कोर्ट के बैन हटाते की ट्रेंड करने लगा था #cryptocurrency

साल 2018 में क्रिप्टोकरंसी द्वारा किये जाने वाले हर ट्रांजेक्शन पर बैन लगने के बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने इस पर से बैन हटा दिया है। फैसला सामने आते ही ट्वीटर क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन पर #cryptocurrency हैशटैग ट्रेंड करने लगा था।

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

हाइलाइट्स :

सुप्रीम कोर्ट ने आज क्रिप्टोकरंसी से बैन हटा दिया

ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा था #cryptocurrency

सुप्रीम कोर्ट ने RBI के दो साल पुराने सर्कुलर को किया खारिज

क्रिप्टोकरंसी को डिजिटल करंसी भी कहा जाता है

राज एक्सप्रेस। आज ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए क्रिप्टोकरंसी से जुड़े फैसले से ट्रेडिंग करने वाले बिजनेस पर्सन को ख़ुशी की खबर मिली है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दो साल पुराने सर्कुलर को खारिज करते हुए क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन क्रिप्टोकरंसी से बैन हटा दिया है। न्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने क्रिप्टोकरंसी के मामले पर फैसला सुनाया जिसमें जस्टिस अनिरुद्ध बोस और वी रामसुब्रमण्यन भी शामिल थे। बता दें कि, RBI द्वारा 6 अप्रैल 2018 को क्रिप्टोकरंसी द्वारा किये जाने वाले हर ट्रांजेक्शन पर बैन लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट के बैन हटाने का फैसला सामने आते ही ट्वीटर पर #cryptocurrency हैशटैग ट्रेंड करने लगा था।

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