क्रिप्टोक्यूरेंसी ट्रेडिंग

प्लेटफार्मों की विशेषताएं

प्लेटफार्मों की विशेषताएं
विगत 10 वर्षो में संगठन ने मुम्बई हाई में ऑफशोर तेल एवं गैस परियोजना के विकास और पश्चिमी एवं पूर्वीय समुद्री तट के अन्य क्षेत्रों में विकास के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन ने कई वेल प्लेटफार्म, 30 प्रोसेस प्लैटफार्म के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्ट्रक्चरल प्लेटफार्म जैसे लिविंग क्वाटर्स, फ्लेयर सपोर्ट प्लैटफार्म और विभिन्न परियोजनाओं के लिये एसबीएम हेतु इंजीनियरी परामर्शीं सेवाएं उपलब्ध करायी है।

ऑफशोर तेल एवं गैस

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ईआईएल को ऑफशोर परियोजना जैसे वेल हेड प्लेटफॉर्म, प्रोसेस और गैस कम्प्रैशन प्लेटफार्म, वॉटर इन्जेक्शन व गैस लिफ्ट प्लेटफार्म और सबमरीन पाइपलाइन बिछाने हेतु सेवाओं की पूर्ण श्रृंखला में विशेषज्ञता प्राप्‍त है।

Offshore Oil and Gas

विगत 10 वर्षो में संगठन ने मुम्बई हाई में ऑफशोर तेल एवं गैस परियोजना के विकास और पश्चिमी एवं पूर्वीय समुद्री तट के अन्य क्षेत्रों में विकास के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन ने कई वेल प्लेटफार्म, 30 प्रोसेस प्लैटफार्म के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्ट्रक्चरल प्लेटफार्म जैसे लिविंग क्वाटर्स, फ्लेयर सपोर्ट प्लैटफार्म और विभिन्न परियोजनाओं के लिये एसबीएम हेतु इंजीनियरी परामर्शीं सेवाएं उपलब्ध करायी है।

ऑफशोर पाइपलाइन परियोजना में हमारी क्षमता, सैद्धान्तिक अध्ययन एवं फीसिबिलीटी रिपोर्ट बेसिक एवं डिटेल इंजीनियरी सर्वे, पर्यावरणीय इंजीनियरी क्रय प्रक्रिया निर्माण कार्यो का पर्यवेक्षण, कमिशनिंग एवं सम्पूर्ण परियोजना प्रबन्धन इत्‍यादि में है।

दिल्ली: सरकार ने लॉन्च की ईवी वेब पोर्टल, मिलेगी इलेक्ट्रिक वाहनों की जानकारी

दिल्ली सरकार ने दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए वन-स्टॉप वेबसाइट लॉन्च की है. आईये देखते हैं कि इस वेबसाइट से मुख्य विशेषताएं क्या हैं.

नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने वन-स्टॉप वेबसाइट लॉन्च की है. नई डिजाइन की गई ईवी वेबसाइट ev.delhi.gov.in न केवल उपभोक्ताओं को बल्कि निर्माताओं, शिक्षाविदों और ईवी में रूचि रखने वाले सभी लोगों के लिए एक प्रमुख सूचना संसाधन के रूप में कार्य करेगी. इस वेबसाइट के माध्यम से आम लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन से सम्बंधित सभी उपयोगी जानकारी प्रदान करना है, जिससे की लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना आसान हो जाएगा.

वेबसाइट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं

यह है विशेषताएं

यह है विशेषताएं

यह है विशेषताएं

यह है विशेषताएं

यह है विशेषताएं

यह है विशेषताएं

वन-स्टॉप वेबसाइट

दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा, आधुनिकीकरण हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार, उपयोगकर्ता के अनुकूल, इंटरैक्टिव और संसाधनपूर्ण प्लेटफार्म लोगों को प्रदान करना चाहती है. यह नई वेबसाइट संभावित ईवी उपभोक्ताओं को सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करने में सक्षम है साथ ही उपलब्ध चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुडी सभी जानकारियां भी यहां मौजूद हैं. मैं लोगों से अपील करता हूं की वो एक बार ज़रूर इस वेबसाइट पर जाएं.

सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण पर खर्च होंगे 700 करोड़: किशन रेड्डी

हैदराबाद: केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने सोमवार को घोषणा की कि सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन को 700 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक स्टेशन के रूप में उन्नत और विकसित किया जाएगा। सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन का दौरा करने और स्टेशन पुनर्विकास योजनाओं की समीक्षा करने वाले किशन रेड्डी ने यहां मीडिया को बताया कि सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन में जल्द ही आधुनिक सुविधाएं और बेहतर वास्तुशिल्प डिजाइन होगा। "हमारी योजना यात्रियों के लिए स्टेशन में अति आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने की है। पूरे राज्य में स्टेशन को सर्वश्रेष्ठ के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है ताकि ट्रेन संचालन में किसी भी तरह की बाधा से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि सिकंदराबाद स्टेशन को अगले 40 वर्षों तक यात्रियों की आवश्यकताओं के अनुरूप हवाई अड्डे जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ पुनर्विकास किया जा रहा है।

स्टेशन आधुनिकीकरण परियोजना के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन की पुनर्विकास योजना में आधुनिक यात्री सुविधाएं, आधुनिक वास्तुकला, आधुनिक तकनीक और सभी यात्रियों के लिए आरामदायक सुविधाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि पुनर्विकास का काम 3 चरणों में किया जाएगा, पहले चरण का काम 16 महीने में, दूसरे चरण का 28 महीने में और तीसरे चरण में 36 महीने में पूरा किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि नए स्टेशन भवन में यात्रियों की आसान आवाजाही के लिए 26 लिफ्ट, 32 एस्केलेटर और कई यात्री होंगे। परियोजना की मुख्य विशेषताओं के बारे में बोलते हुए, किशन रेड्डी ने कहा कि जी 3 मंजिलों के साथ उत्तर की ओर एक नया स्टेशन भवन और जी 3 मंजिलों के साथ दक्षिण की ओर की इमारत और एक दो मंजिला आकाश का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि स्टेशन के नए डिजाइन से यात्रियों की एक मोड से दूसरे मोड में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी और यात्रियों की सुविधा के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास ब्लॉक बनाए जाएंगे।

इसके अलावा, किशन रेड्डी ने कहा कि आगमन और प्रस्थान यात्रियों और वाहनों की आवाजाही से बचने के लिए ड्रॉप ऑफ और पिकअप स्थान बनाए जाएंगे। इसके अलावा, वाहनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए स्टेशन में बहु-स्तरीय और भूमिगत कार पार्किंग की सुविधा होगी। यात्रियों की सुविधा के लिए नया स्टेशन भवन सभी प्लेटफार्मों पर इलेक्ट्रॉनिक साइन बोर्ड सहित आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र ने काजीपेट में एक नई रेलवे वैगन आवधिक ओवरहालिंग कार्यशाला को मंजूरी दी है।

Indian Railways News: महंगी हो गई ट्रेन के AC3 Economy डिब्बे में यात्रा, जानिए अब कितने पैसे अतिरिक्त देने होंगे

Indian Railway News: अगर आप भी ट्रेन से यात्रा (Train Travel) करते हैं तो आपके लिए एक बड़ी सूचना है। रेलवे ने हाल ही में जो एसी थ्री का इकॉनमी कोच (AC3 Economy Coach) डेवलप किया है, उसमें अब सस्ती यात्रा नहीं होगी। हां, यह जरूर होगा कि अब इस कोच में भी यात्रियों को कंबल-चादर (Bed Roll) फ्री में मिलेंगे।

traveling in the ac3 economy compartment of the train has become expensive, know how much extra money will have to be paid now

Indian Railways News: महंगी हो गई ट्रेन के AC3 Economy डिब्बे में यात्रा, जानिए अब कितने पैसे अतिरिक्त देने होंगे

क्या है रेलवे का फैसला

रेलवे बोर्ड से जारी एक कामर्शियल सर्कुलर के मुताबिक अब एसी 3 के इकोनोमी कोच को एसी थ्री कोच में यूनिफाई कर दिया गया है। मतलब कि दोनों कोच में अब बराबर किराया लगेगा। पहले एसी 3 इकॉनोमी कोच में सामान्य एसी 3 कोच के मुकाबले करीब आठ फीसदी किराया कम लगता था। हालांकि एसी 3 इकॉनोमी कोच में पहले बेड लिनेन मतलब कंबल और चादर नहीं मिलते थे। बीते 20 सितंबर से ही इन कोचों में कंबल चादर की व्यवस्था की गई है।

इकॉनोमी कोच में कम है जगह

अभी तक देश में जो भी एलएचबी (LHB) प्लेटफार्म के एसी कोच चल रहे हैं, उनमें अधिकतम 72 बर्थ की व्यवस्था है। लेकिन इस एसी 3 इकॉनमी कोच में 83 बर्थ की व्यवस्था है। मतलब कि सामान्य एसी थ्री कोच से 11 बर्थ ज्यादा। इतने अतिरिक्त बर्थ लग सके, इसके लिए पहले से लग रहे बर्थ की चौड़ाई कम की गई है। हर कूपे में थोड़ा लेग स्पेस भी घटाया गया है ताकि एक अतिरिक्त कूपा बनाने के लिए जगह निकल सके। इसके अलावा कोच से लिनेन स्टोर और हॉट केस भी हटा दिए गए हैं।

अब इन डिब्बों में लिनेन कहां रखा जाएगा

रेलवे बोर्ड के सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि एसी थ्री इकॉनमी कोच (AC 3 Economy) में अंतिम तीन बर्थ पर किसी यात्री की बुकिंग नहीं होगी। इस डिब्बे में अंतिम तीन बर्थ का नंबर 81, 82 और 83 है। इन बर्थ पर पैसेंजर की बुकिंग ब्लॉक कर दी जाएगी। उसी जगह को घेर कर लिनेन का स्टोर रूम बना दिया गया है। इसी में कंबल और चादरों के बैग स्टॉक किए जाएंगे।

कब से होगी यह व्यवस्था

रेल मंत्रालय के सर्कुलर में इस बारे में कोई स्पष्ट तारीख नहीं दी गई है। हालांकि, उसमें बताया गया है कि यह बदलाव एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (Advance Reservation Period) से लागू हो जाएगा। मतलब कि अब आप किसी ट्रेन के एसी थ्री इकॉनमी कोच में रिजर्वेशन कराना चाहें तो नहीं होगा। आपको जबरन एसी थ्री कोच में ही रिजर्वेशन कराना होगा। भले ही आपकी बर्थ एसी 3 इकॉनमी कोच में क्यों नहीं अलॉट की जाए।

जब कोच बना था तब क्या कहा गया था

जब इस डिब्बे प्लेटफार्मों की विशेषताएं को जर्मन तकनीक वाले एलएचबी (LHB Coach) प्लेटफार्म पर विकसित किया गया था, तब बताया गया था कि इन डिब्बों में सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले 15 फीसदी (11 Bearth) सीटें ज्यादा हैं। इसलिए इसमें सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले करीब 8 फीसदी कम किराया लगेगा। यदि स्लीपर क्लास के किराए से तुलना करें तो इसका बेस फेयर सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के स्लीपर क्लास के किराए का 2.4 गुना ज्यादा था। वहीं रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज और जीएसटी जैसे चार्ज 3 टीयर एसी कोच जितने ही लगते थे।

और क्या विशेषता है इस कोच की

एसी-3 इकॉनोमी के डिब्बों की बात करें, तो इस कोच के बर्थ काफ़ी हल्के लेकिन मज़बूत बनाए गए हैं। हर केपे में स्नैक्स टेबल की व्यवस्था की गई है।हर बर्थ के साथ मोबाइल या लैपटॉप चार्जिंग के लिए पोर्ट दिए गए हैं। हर बर्थ के साथ रिडिंग लाइट भी लगाया गया है। ऊपर के बर्थ पर चढने के लिए बेहतर सीढ़ियां बनाई गई हैं। कोच में फायर अलार्म सिस्टम की भी व्यवस्था है। दिव्यांगों के लिए चौड़े दरवाज़ रखे गए हैं ताकि व्हील चेयर को अंदर तक लाया जा सके।

Investment Tips: बाजार के जोखिम से बचाते हैं 'बॉन्ड', जानिए कैसे करें इनमें निवेश और कितना मिलता है रिटर्न

सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करके स्थिर और सुरक्षित रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है.

सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करके स्थिर और सुरक्षित रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है.

बॉन्ड कम जोखिम के साथ स्थिर और निश्चित रिटर्न देने वाले विकल्प माने जाते हैं. एनएसई ऐप या बॉन्ड प्लेटफार्म के जरिए सरकारी बॉन्ड में निवेश किया जा सकता है. कूपन वैल्यू, मैच्योरिटी, लिक्विडिटी और अन्य विशेषताओं के साथ बॉन्ड में निवेश कई विकल्प हैं.

  • News18 हिंदी
  • Last Updated : November 21, 2022, 12:27 IST

हाइलाइट्स

बॉन्ड एक डेब्ट इंस्ट्रूमेंट होता हैं जिसका अर्थ प्रतिभूति या ऋणपत्र होता है.
मुख्य रूप से बॉन्ड सरकार और कंपनियों के द्वारा जारी किये जाते हैं.
इनमें एक निश्चित ब्याज दर का भुगतान करने का वादा किया जाता है.

नई दिल्ली. बाजार में उच्च और कम जोखिम से जुड़े निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं. आपने अक्सर बॉन्ड के बारे में सुना होगा. ये कम जोखिम के साथ स्थिर और निश्चित रिटर्न देने वाले विकल्प माने जाते हैं. महंगाई और अन्य आर्थिक अनिश्चितता के बीच बाजार में जब भी वॉलेटिलिटी बढ़ती है तो निवेशक सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड में पैसा लगाते हैं.

एनएसई ऐप या बॉन्ड प्लेटफार्म के जरिए सरकारी बॉन्ड में निवेश किया जा सकता है. कूपन वैल्यू, मैच्योरिटी, लिक्विडिटी और अन्य विशेषताओं के साथ बॉन्ड में निवेश कई विकल्प हैं. खास बात यह है कि ये सभी जोखिम रहित हैं. आइये समझते हैं बॉन्ड क्या होते हैं, कितने प्रकार के होते हैं और इनमें कैसे निवेश किया जा सकता है.

क्या होते हैं बॉन्ड?
बॉन्ड एक डेब्ट इंस्ट्रूमेंट होता हैं जिसका अर्थ प्रतिभूति या ऋणपत्र होता है. बॉन्ड्स के जरिए निवेशक बॉन्ड जारीकर्ता को लोन उपलब्ध करवाते हैं. इसके बदले प्लेटफार्मों की विशेषताएं में बॉन्ड जारी किया जाता है. इसमें एक निश्चित ब्याज दर का भुगतान करने का वादा किया जाता है. इन जारी प्लेटफार्मों की विशेषताएं किये बॉन्ड्स पर ब्याज दर लिखी होती हैं जिसे कूपन रेट भी कहा जाता है.

मुख्य रूप से बॉन्ड सरकार और कंपनियों के द्वारा जारी किये जाते हैं. निवेश के लिहाज से बॉन्ड्स काफी सुरक्षित माने जाते हैं. कंपनी का बॉन्ड धारक को भुगतान करने की प्रथम जिम्मेदारी होती है.

कितने तरह के होते हैं बॉन्ड

फिक्सड रेट बॉन्ड: इनमें निवेश करने पर निवेशक को मैच्योरिटी तक ब्याज की एक निश्चित रकम मिलती है.

फ्लोटिंग रेट बॉन्ड: इसमें इंटरेस्ट रेट बेंचमार्क के अनुसार परिवर्तित होती रहती है. आमतौर पर ये बॉन्ड सरकारों द्वारा जारी किए जाते हैं.

जीरो कूपन बॉन्ड: ऐसे बॉन्ड डिस्काउंट पर जारी किए जाते हैं और इन्हें बॉन्ड होल्डर्स से निश्चित अवधि के बाद वापस खरीदा जाता है. इसमें आने वाला अंतर ही निवेशक की कमाई है.

कन्वर्टिबल बॉन्ड: इसमें ब्याज का भुगतान होता है और मैच्योरिटी पर फेस वैल्यू मिलती है. खास बात है कि इन्हें जारीकर्ता कंपनी द्वारा शेयरों में भी बदला जा सकता है.

कैसे खरीदें बॉन्ड
आप घर बैठे ऑनलाइन डायरेक्ट बॉन्ड खरीद सकते हैं. ऑनलाइन वेबसाइट से बॉन्ड खरीदने पर ये आपके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट हो जाते हैं. कॉर्पोरेट बॉन्ड्स स्टॉक एक्सचेंज पर भी ट्रेड के लिए उपलब्ध होते हैं. स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से इन्हें खरीदा और बेचा जा सकता है. गवर्नमेंट बॉन्ड्स भी बोली के जरिए ब्रोकर की मदद से खरीदे जा सकते हैं.

निवेशक चाहे तो सीधे बैंक के द्वारा भी बॉन्ड खरीद सकते हैं. इन सब के अलावा जो कंपनी अपने बॉन्ड जारी करती है. उनकी ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए भी बॉन्ड की खरीदी की जा सकती है.

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